प्लक्षद्वीपवर्णनम्
Description of Plakṣa-dvīpa
लोकार्द्धे संमिता लोका निरालोकास्तु बाह्यतः / लोकविस्तारमात्रं तु ह्यलोकः सर्वतो बहिः
lokārddhe saṃmitā lokā nirālokāstu bāhyataḥ / lokavistāramātraṃ tu hyalokaḥ sarvato bahiḥ
लोकों का परिमाण लोक-विस्तार के आधे तक है; बाहर की ओर ‘निरालोक’ हैं; और ‘अलोक’ तो लोक-विस्तार के बराबर होकर सब ओर बाहर स्थित है।