कैलास-मन्दाकिनी-स्वच्छोदा-लौहित्य-सरयू-उद्गमवर्णनम्
Kailāsa and the Origins of Mandākinī, Svacchodā, Lauhitya, and Sarayū
शुनासुखांश्चोर्द्धमरून्सिन्धुरेतान्निषेवते / गन्धर्वकिन्नरान्यक्षान्रक्षोविद्याधरोरगान्
śunāsukhāṃścorddhamarūnsindhuretānniṣevate / gandharvakinnarānyakṣānrakṣovidyādharoragān
गंगा शुनासुख, ऊर्ध्वमरु, सिन्धु आदि प्रदेशों तथा गन्धर्व, किन्नर, यक्ष, राक्षस, विद्याधर और नागों के निवास-स्थानों को भी पवित्र करती हुई प्रवाहित होती है।