Pṛthivy-Āyāma-Vistara (Extent of the Earth) and Jambūdvīpa–Navavarṣa Description
अपरे क्षीरिणो नाम वृक्षास्तत्र मनोरमाः / ये क्षरन्ति सदा क्षीरं षड्रसं ह्यमृतोपमम्
apare kṣīriṇo nāma vṛkṣāstatra manoramāḥ / ye kṣaranti sadā kṣīraṃ ṣaḍrasaṃ hyamṛtopamam
वहाँ ‘क्षीरिण’ नाम के अन्य मनोहर वृक्ष भी हैं, जो सदा छह रसों से युक्त, अमृत के समान दूध का स्रवण करते हैं।