Priyavrata-vaṃśa and Saptadvīpa Vibhāga (प्रियव्रतवंशः सप्तद्वीपविभागश्च)
ऋषिभिर्दैवतैश्चापि पिर्तृगन्धवराक्षसैः / यक्षभूतपिशाचैश्च मनुष्यमृगपक्षिभिः / तेषां सृष्टिरियं प्रोक्ता युगैः सह विवर्त्तते
ṛṣibhirdaivataiścāpi pirtṛgandhavarākṣasaiḥ / yakṣabhūtapiśācaiśca manuṣyamṛgapakṣibhiḥ / teṣāṃ sṛṣṭiriyaṃ proktā yugaiḥ saha vivarttate
ऋषियों, देवताओं, पितरों, गन्धर्वों, राक्षसों, यक्षों, भूतों, पिशाचों तथा मनुष्यों, मृगों और पक्षियों द्वारा—इन सबकी यह सृष्टि कही गई है, जो युगों के साथ-साथ परिवर्तित होती रहती है।