Priyavrata-vaṃśa and Saptadvīpa Vibhāga (प्रियव्रतवंशः सप्तद्वीपविभागश्च)
स्वायंभुवेंऽतरे पूर्वं शतशो ऽथ सहस्रशः / एवं स्वायं भुवः सर्गो येनेदं पूरितं जगत्
svāyaṃbhuveṃ'tare pūrvaṃ śataśo 'tha sahasraśaḥ / evaṃ svāyaṃ bhuvaḥ sargo yenedaṃ pūritaṃ jagat
स्वायंभुव मन्वंतर से पहले, सैकड़ों और फिर हजारों (सृष्टियाँ) हुईं। इस प्रकार स्वायंभुव की सृष्टि से यह जगत् परिपूर्ण हुआ।