अग्निनिचयः (Agninichaya) / The Accumulation of Sacred Fire & the Classification of Pitṛs by Time-Order
ततस्त्वभ्यर्चिताः सर्वा न्यवसंस्ताः पितुर्गृहे / तासां ज्येष्ठा सती नाम पत्नी या त्र्यंबकस्य वै
tatastvabhyarcitāḥ sarvā nyavasaṃstāḥ piturgṛhe / tāsāṃ jyeṣṭhā satī nāma patnī yā tryaṃbakasya vai
तब वे सब पूजित होकर पिता के घर में रहने लगीं। उनमें ज्येष्ठा ‘सती’ नाम की थी, जो वास्तव में त्र्यम्बक (शिव) की पत्नी थी।