अग्निनिचयः (Agninichaya) / The Accumulation of Sacred Fire & the Classification of Pitṛs by Time-Order
तदाख्यास्तत्ससत्त्वाश्च तदात्मानश्च ते स्मृताः / प्रजापतिः स्मृतो यस्तु स तु संवत्सरो मतः
tadākhyāstatsasattvāśca tadātmānaśca te smṛtāḥ / prajāpatiḥ smṛto yastu sa tu saṃvatsaro mataḥ
वे उसी के नाम वाले, उसी के सत्त्व से युक्त और उसी के आत्मस्वरूप माने गए हैं। जो प्रजापति स्मृत है, वही ‘संवत्सर’ माना गया है।