पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
ततो देवास्ततो भूमिरेषा लोकपरंपरा / लोके वर्षन्ति ते ह्यस्मिंस्तेभ्यः पर्जन्यसंभवः
tato devāstato bhūmireṣā lokaparaṃparā / loke varṣanti te hyasmiṃstebhyaḥ parjanyasaṃbhavaḥ
फिर उनसे देव उत्पन्न हुए, फिर यह पृथ्वी—यही लोकों की परंपरा है। वे इस लोक में वर्षा करते हैं; और उनसे ही पर्जन्य (वृष्टि-देव) का उद्भव होता है।