पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
ते पुत्रानब्रुवन्प्रीता लब्धसंज्ञा दिवौकसः / यूयं वै पितरो ऽस्माकं यैर्वयं प्रतिबोधिताः
te putrānabruvanprītā labdhasaṃjñā divaukasaḥ / yūyaṃ vai pitaro 'smākaṃ yairvayaṃ pratibodhitāḥ
दिव्यलोक के देवता चेतना पाकर प्रसन्न होकर पुत्रों से बोले—तुम ही हमारे पिता हो, जिनके द्वारा हम जाग्रत किए गए।