Marut-Soma Boon and Nahusha–Yayati Lineage
Marutakanyā–Vamśa-varṇana
अन्नं तस्य सकृद्भुक्तमहोरात्रं न क्षीयते / कोटिशो दीय मानं च सूर्यस्योदयनादपि
annaṃ tasya sakṛdbhuktamahorātraṃ na kṣīyate / koṭiśo dīya mānaṃ ca sūryasyodayanādapi
उसका अन्न एक बार खा लेने पर भी दिन-रात क्षीण नहीं होता; और सूर्य के उदय से भी वह करोड़ों बार बाँटा जाए तो भी घटता नहीं।