गान्धर्वमूर्छनालक्षणवर्णनम्
Description of Gandharva Mūrchanā Characteristics
पादभागसपादं तु प्रकृत्यमपि संस्थितम् / चतुर्थमुत्तरं चैवमद्रवत्पावमद्रकौ
pādabhāgasapādaṃ tu prakṛtyamapi saṃsthitam / caturthamuttaraṃ caivamadravatpāvamadrakau
पाद-भाग सहित यह प्रकृति में ही स्थित है। चौथा उत्तर भी इसी प्रकार है; मद्रवत् और पावमद्रक—दोनों का विधान कहा गया है।