गान्धर्वमूर्छनालक्षणवर्णनम्
Description of Gandharva Mūrchanā Characteristics
स्वरस्वरबहुग्रामकाप्रयोष्टनुपत्कला / प्रक्षिप्तमेव कलयाचोपादानारयो भवेत्
svarasvarabahugrāmakāprayoṣṭanupatkalā / prakṣiptameva kalayācopādānārayo bhavet
स्वरों-स्वरों के अनेक समूहों में, काप्रयोष्टनुपत् नामक कला होती है। उसी कला से ‘प्रक्षिप्त’ होता है, और वही उपादान तथा अरि-भाव का हेतु बनता है।