यज्ञसमापन-दक्षिणा-आवभृथस्नान-वर्णनम्
Completion of the Sacrifice, Gifts, and Avabhṛtha Bath
एवं संतर्प्य विप्रादीन्दक्षिणाभिर्यथाक्रमम् / क्षमापयामास गुरून्सदस्यान्प्रणिपत्य च
evaṃ saṃtarpya viprādīndakṣiṇābhiryathākramam / kṣamāpayāmāsa gurūnsadasyānpraṇipatya ca
इस प्रकार क्रमशः दक्षिणाएँ देकर विप्रों आदि को तृप्त कर, उसने गुरुजनों और सभा के सदस्यों को प्रणाम करके क्षमा याचना की।