यज्ञसमापन-दक्षिणा-आवभृथस्नान-वर्णनम्
Completion of the Sacrifice, Gifts, and Avabhṛtha Bath
संसेव्यमानश्च तदा नानादेशेश्वरैर्नृपैः / सभायां राजशार्दूलो रेमे शक्र इवापरः
saṃsevyamānaśca tadā nānādeśeśvarairnṛpaiḥ / sabhāyāṃ rājaśārdūlo reme śakra ivāparaḥ
तब विविध देशों के अधिपति राजाओं द्वारा सेवित वह राजशार्दूल सभा में दूसरे इन्द्र के समान रमण करने लगा।