यज्ञसमापन-दक्षिणा-आवभृथस्नान-वर्णनम्
Completion of the Sacrifice, Gifts, and Avabhṛtha Bath
स प्रविश्य गृहं रम्यं सर्वमण्डलमण्डितम् / सम्यक्संभावयामास सुहृदो ब्राह्मणानपि
sa praviśya gṛhaṃ ramyaṃ sarvamaṇḍalamaṇḍitam / samyaksaṃbhāvayāmāsa suhṛdo brāhmaṇānapi
वह सब मण्डलों से सुशोभित रमणीय गृह में प्रवेश कर, मित्रों तथा ब्राह्मणों का भी यथोचित सत्कार करने लगा।