सगरचरिते सागराविनाशः
The Quelling of the Ocean-Destruction Episode in the Sagara Narrative
यत्तोयप्लावितेष्वस्थिभस्मलोमनखेष्वपि / निरयादपि संयाति देही स्वर्लोकमक्षयम्
yattoyaplāviteṣvasthibhasmalomanakheṣvapi / nirayādapi saṃyāti dehī svarlokamakṣayam
जिसके जल से अस्थि, भस्म, रोम और नख तक भी प्लावित हो जाएँ, वह देही नरक से भी निकलकर अक्षय स्वर्लोक को प्राप्त होता है।