सगरचरिते सागराविनाशः
The Quelling of the Ocean-Destruction Episode in the Sagara Narrative
स त्वं धैर्यधनो भूत्वा भवित व्यतयात्मनः / नष्टं मृतमतीतं च नानुशोचन्ति पण्डिताः
sa tvaṃ dhairyadhano bhūtvā bhavita vyatayātmanaḥ / naṣṭaṃ mṛtamatītaṃ ca nānuśocanti paṇḍitāḥ
तुम धैर्य को धन मानकर, जो होना था उसे स्वीकार करो; जो नष्ट, मृत और बीत गया—उस पर पण्डित शोक नहीं करते।