अश्वमोचनम् (Aśvamocanam) — “The Release/Recovery of the Sacrificial Horse”
एवं क्रोधाग्निना तेन सागराः पापचेतसः / जज्वलुः सहसा दावे तरवो नीरसा इव
evaṃ krodhāgninā tena sāgarāḥ pāpacetasaḥ / jajvaluḥ sahasā dāve taravo nīrasā iva
इस प्रकार उस क्रोधाग्नि से पाप-चित्त सागर-पुत्र सहसा वैसे ही जल उठे जैसे दावानल में रसहीन वृक्ष।