सगरस्यौर्वाश्रमगमनम्
Sagara’s Journey to Aurva’s Hermitage
असमञ्जसत्वं नगरे चक्रे सो ऽपि नृशंसवत् / बालांश्च यूनः स्थविरान्योषितश्च सदा खलः
asamañjasatvaṃ nagare cakre so 'pi nṛśaṃsavat / bālāṃśca yūnaḥ sthavirānyoṣitaśca sadā khalaḥ
उसने नगर में नृशंस की भांति अनुचित कार्य (असमंजस) किए। वह दुष्ट सदा बालकों, युवाओं, वृद्धों और स्त्रियों को सताता था।