सगरस्यौर्वाश्रमगमनम्
Sagara’s Journey to Aurva’s Hermitage
न प्रादाच्च ततो मौढ्यात्तस्मै यत्तत्प्रतिश्रुतम् / प्रतिश्रुताप्रदानोत्थरोषं न श्रद्दधे नृप
na prādācca tato mauḍhyāttasmai yattatpratiśrutam / pratiśrutāpradānottharoṣaṃ na śraddadhe nṛpa
पर मूढ़ता से उसने उसे वह नहीं दिया, जो उसने वचन में कहा था; हे नृप, वचन न निभाने से उठने वाले क्रोध पर उसने विश्वास न किया।