सगरदिग्विजयः
Sagara’s World-Conquest / Digvijaya
अपि जेतुं त्रिवर्गं त्वमुपायैः सम्यगीहसे / फलन्ति हि गुणास्तुभ्यं त्वया सम्यक्प्रचोदिताः
api jetuṃ trivargaṃ tvamupāyaiḥ samyagīhase / phalanti hi guṇāstubhyaṃ tvayā samyakpracoditāḥ
क्या तुम उचित उपायों से त्रिवर्ग—धर्म, अर्थ, काम—को जीतने का यत्न करते हो? क्योंकि तुम्हारे गुण, तुम्हारे द्वारा ठीक से प्रेरित होकर फलते हैं।