हिरण्यकशिपुजन्म-तपः-वरप्रभावः
Birth, Austerity, and Boon-Power of Hiraṇyakaśipu
वातस्कन्धः परिवहस्तत्र तिष्ठन्तु मे सुताः / एतान्सर्वाश्चरन्त्वन्ते कालेकाले ममात्मजाः
vātaskandhaḥ parivahastatra tiṣṭhantu me sutāḥ / etānsarvāścarantvante kālekāle mamātmajāḥ
वातस्कन्ध वहाँ प्रवाहित होता रहे; मेरे पुत्र वहीं स्थित रहें। समय-समय पर अंत में मेरे आत्मज इन सबका विचरण करें।