हिरण्यकशिपुजन्म-तपः-वरप्रभावः
Birth, Austerity, and Boon-Power of Hiraṇyakaśipu
निद्रयापहृता दवी शिरः कृत्वा तु जानुनि / केशान्कृत्वा तु पादस्थान्सा सुष्वाप च देवता
nidrayāpahṛtā davī śiraḥ kṛtvā tu jānuni / keśānkṛtvā tu pādasthānsā suṣvāpa ca devatā
निद्रा से आक्रान्त वह देवी, सिर को घुटनों पर रखकर और केशों को पैरों की ओर करके, वह देवता-स्वरूपा स्त्री सो गई।