हिरण्यकशिपुजन्म-तपः-वरप्रभावः
Birth, Austerity, and Boon-Power of Hiraṇyakaśipu
सर्वकर्मसु निष्णात आत्मनो हितमाचर / वरं श्रुत्वा तु त द्वाक्यं मातुः शक्रः प्रहर्षितः
sarvakarmasu niṣṇāta ātmano hitamācara / varaṃ śrutvā tu ta dvākyaṃ mātuḥ śakraḥ praharṣitaḥ
सब कर्मों में निपुण होकर अपने हित का आचरण करो। माता के उस श्रेष्ठ वचन को सुनकर शक्र अत्यन्त हर्षित हुआ।