Samantapañcaka at Kurukṣetra: Paraśurāma’s Tīrtha-Creation and Pitṛ-Rites (समन्तपञ्चक-तीर्थप्रशंसा)
पितुर्न्न ते ऽपराध्यन्ते न स्वतन्त्रं यतो जगत् / तन्निमित्तं तु मरणं पितुस्ते विहितं पुरा
piturnna te 'parādhyante na svatantraṃ yato jagat / tannimittaṃ tu maraṇaṃ pituste vihitaṃ purā
तुम्हारे पिता के प्रति कोई अपराध नहीं होता, क्योंकि जगत् स्वतंत्र नहीं है। उसी निमित्त से तुम्हारे पिता का मरण पहले ही नियत किया गया था।