Bhārgava-Charita: Rāma (Paraśurāma) Returns to Jamadagni’s Āśrama
निलिल्युः क्षत्त्रियाः सर्वे यत्र तत्र निरीक्ष्य तम् / व्रजन्तं भार्गवं मार्गे प्राणरक्षणतत्पराः
nililyuḥ kṣattriyāḥ sarve yatra tatra nirīkṣya tam / vrajantaṃ bhārgavaṃ mārge prāṇarakṣaṇatatparāḥ
उसे देखते ही सब क्षत्रिय जहाँ-तहाँ छिप गए; मार्ग में जाते हुए उस भार्गव को देखकर वे अपने प्राणों की रक्षा में ही तत्पर थे।