गणेश-एकदन्त-उत्पत्तिः (Origin of Gaṇeśa’s Single Tusk) / Bhārgava–Gaṇeśa Encounter
मेघश्यामो विशदवदनो रत्नकेयूरहारो विद्युद्वासा मकरसदृशे कुण्डले संदधानः / बर्हापीडं मणिगणयुतं बिभ्रदीषत्स्मितास्यो गोपीनाथो गदितसुयशाः कौस्तुभोद्भासिवक्षाः
meghaśyāmo viśadavadano ratnakeyūrahāro vidyudvāsā makarasadṛśe kuṇḍale saṃdadhānaḥ / barhāpīḍaṃ maṇigaṇayutaṃ bibhradīṣatsmitāsyo gopīnātho gaditasuyaśāḥ kaustubhodbhāsivakṣāḥ
मेघ-श्याम, निर्मल मुख वाले, रत्नजटित केयूर और हार धारण किए, बिजली-सी वेशभूषा में, मकर-आकृति कुण्डल पहने; मणियों से युक्त मोरपंख का मुकुट धारण किए, हल्की मुस्कान वाले—गोपीनाथ, जिनकी कीर्ति गायी जाती है, कौस्तुभ से दमकती छाती वाले थे।