Reṇukā-vilāpa and the Aftermath of Jamadagni’s Slaying (अर्जुनोपाख्यान-प्रसङ्गः)
आश्रमादभिनिष्क्रान्तः सहसा व्यसानर्णवे / क्षिप्त्वानाथामगाधे मां क्व च यातो ऽसि मानद
āśramādabhiniṣkrāntaḥ sahasā vyasānarṇave / kṣiptvānāthāmagādhe māṃ kva ca yāto 'si mānada
आश्रम से सहसा निकलकर तुम विपत्ति-समुद्र में जा पड़े; मुझे अनाथा को इस अथाह में फेंककर, हे मानद, तुम कहाँ चले गए?