Rāja-prabodhana and Prātaḥ-kṛtya
Awakening of the King and Morning Observances
विषं हन्त्युपयोक्तारं लक्ष्यभूतं तु हैहय / कुलं समूलं दहति ब्रह्मस्वारणिपावकः
viṣaṃ hantyupayoktāraṃ lakṣyabhūtaṃ tu haihaya / kulaṃ samūlaṃ dahati brahmasvāraṇipāvakaḥ
विष अपने भोगने वाले को मार डालता है, हे हैहय, जो लक्ष्य बनता है; पर ब्रह्मस्व की अग्नि तो कुल को जड़ सहित भस्म कर देती है।