रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
क्वचिदर्काशुसंभिन्नश्चामीकरशिलाश्रितैः / यक्षौघैर्भासितोपान्तं विशद्भिरिवपावकम्
kvacidarkāśusaṃbhinnaścāmīkaraśilāśritaiḥ / yakṣaughairbhāsitopāntaṃ viśadbhirivapāvakam
कहीं सूर्यकिरणों से झिलमिलाती स्वर्ण-शिलाओं पर स्थित यक्ष-समूहों से उसका उपान्त ऐसा चमका मानो निर्मल अग्नि हो।