रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
दरीमुखविनिष्क्रान्ततरक्षूत्पतनाकुलैः / मृगयूथार्त्तसन्नादैरापूरितगुहं क्वचित्
darīmukhaviniṣkrāntatarakṣūtpatanākulaiḥ / mṛgayūthārttasannādairāpūritaguhaṃ kvacit
कहीं दरियों के मुख से निकलकर उछलते तरक्षुओं की हलचल और मृग-यूथों की आतुर चीत्कार से गुहा भर गई।