रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
उपत्यकशिलापृष्ठवालातपनिषेविभिः / तुषारक्लिन्नसिद्धौघौरुद्भासितवनं क्वचित्
upatyakaśilāpṛṣṭhavālātapaniṣevibhiḥ / tuṣāraklinnasiddhaughaurudbhāsitavanaṃ kvacit
उपत्यका की शिलाओं की पीठ पर धूप सेंकते और तुषार से भीगे सिद्ध-समूहों से कहीं वन अद्भुत प्रकाश से दमक उठा।