रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
स्फटिकाञ्जनदुर्वर्णस्वर्णराशिप्रभाकरैः / स्फुरत्परस्परच्छायाशरैर्द्दीप्तवनं क्वचित्
sphaṭikāñjanadurvarṇasvarṇarāśiprabhākaraiḥ / sphuratparasparacchāyāśarairddīptavanaṃ kvacit
स्फटिक, अंजन-सी काली आभा और स्वर्ण-राशियों की प्रभा से, परस्पर चमकती छायाओं के बाणों-सी किरणों से कहीं वन दीप्त हो उठा।