Nakṣatra-Śrāddha (Ancestral Rites Connected with Asterisms) — नक्षत्रश्राद्धम्
आनन्त्याय भवेत्तद्वत्खड्गमांसं पितृक्षये / पायसं मधुसर्पिर्भ्यां छायायां कुञ्जरस्य च
ānantyāya bhavettadvatkhaḍgamāṃsaṃ pitṛkṣaye / pāyasaṃ madhusarpirbhyāṃ chāyāyāṃ kuñjarasya ca
पितृक्षय के अवसर पर खड्ग (गैंडे) का मांस भी उसी प्रकार अनन्त फल देने वाला होता है। मधु और घृत से युक्त पायस, तथा हाथी की छाया में किया गया (श्राद्ध) भी तृप्तिदायक कहा गया है।