Śrāddha-kalpa: Amarakantaka–Tīrtha-Māhātmya and Akṣaya Pitṛ-Tarpaṇa
पुंसः सन्निहितायां तु कुरूक्षेत्रे विशेषतः / अर्चयित्वा पितॄंस्तत्र स पुत्रस्त्वनृणो भवेत्
puṃsaḥ sannihitāyāṃ tu kurūkṣetre viśeṣataḥ / arcayitvā pitṝṃstatra sa putrastvanṛṇo bhavet
कुरुक्षेत्र में विशेष रूप से उपस्थित होकर जो वहाँ पितरों का पूजन करता है, वह पुत्र पितृऋण से मुक्त हो जाता है।