Śrāddha-kalpa: Amarakantaka–Tīrtha-Māhātmya and Akṣaya Pitṛ-Tarpaṇa
यत्र मृत्योर्गतिर्न्नास्ति तथैवासुररक्षसाम् / न भयं नैव चालक्ष्मीर्यावद्भूमिर्द्धरिष्यति
yatra mṛtyorgatirnnāsti tathaivāsurarakṣasām / na bhayaṃ naiva cālakṣmīryāvadbhūmirddhariṣyati
जहाँ मृत्यु का प्रवेश नहीं, और न ही असुरों व राक्षसों की गति है; जब तक पृथ्वी धारण करेगी, वहाँ न भय है और न ही अलक्ष्मी।