Śrāddha-kalpa: Amarakantaka–Tīrtha-Māhātmya and Akṣaya Pitṛ-Tarpaṇa
ऋणैस्त्रिभिस्ततः स्नात्वा निष्क्रीणाति नरस्तनुम् / मानसे सरसि स्नात्वा श्राद्धंनिर्वर्त्तयेत्ततः
ṛṇaistribhistataḥ snātvā niṣkrīṇāti narastanum / mānase sarasi snātvā śrāddhaṃnirvarttayettataḥ
वहाँ स्नान करके मनुष्य तीन ऋणों से मुक्त होकर अपने शरीर का उद्धार करता है। फिर मानस सरोवर में स्नान करके श्राद्ध का अनुष्ठान करे।