Śrāddha-kalpa: Amarakantaka–Tīrtha-Māhātmya and Akṣaya Pitṛ-Tarpaṇa
तत्र स्नात्वा दिवंयान्ति स्वशरीरेण मानवाः / दत्तं वापि सदा श्राद्धमक्षय्यं समुदाहृतम्
tatra snātvā divaṃyānti svaśarīreṇa mānavāḥ / dattaṃ vāpi sadā śrāddhamakṣayyaṃ samudāhṛtam
वहाँ स्नान करके मनुष्य अपने इसी शरीर सहित स्वर्ग को जाते हैं। वहाँ दिया गया श्राद्ध भी सदा अक्षय फल देने वाला कहा गया है।