श्राद्धकल्पे पितृदेवपूजाक्रमः (Śrāddhakalpa: Order of Pitṛ and Deva Worship)
वरं वृणीध्वं प्रीताः स्म कं कामं कखामहे / एवमुक्ते तु पितृभिस्तदा त्रैलोक्यभावनः
varaṃ vṛṇīdhvaṃ prītāḥ sma kaṃ kāmaṃ kakhāmahe / evamukte tu pitṛbhistadā trailokyabhāvanaḥ
पितरों ने कहा—“हम प्रसन्न हैं; वर माँगो, तुम्हें कौन-सी कामना चाहिए?” ऐसा कहे जाने पर तब त्रैलोक्य के पालनकर्ता ने (उत्तर दिया)।