श्राद्धकल्पे पितृदेवपूजाक्रमः (Śrāddhakalpa: Order of Pitṛ and Deva Worship)
अनुपूर्वं ततो विप्रान्भक्ष्यैरन्नैश्च शक्तितः / स्निग्धैरुष्णैः सुगन्धैश्च तर्पयेत्तान्रसैरपि
anupūrvaṃ tato viprānbhakṣyairannaiśca śaktitaḥ / snigdhairuṣṇaiḥ sugandhaiśca tarpayettānrasairapi
फिर क्रम से ब्राह्मणों को अपनी शक्ति के अनुसार भक्ष्य और अन्न से, घृतयुक्त, गरम, सुगंधित पदार्थों तथा रसों से भी तृप्त करे।