श्राद्धकल्पे पितृदेवपूजाक्रमः (Śrāddhakalpa: Order of Pitṛ and Deva Worship)
पितॄणां हि भवेदेतत्साक्षादिव हुतं हविः / ब्रह्मणानां सहस्रस्य योगस्थं ग्रासयेद्यदि
pitṝṇāṃ hi bhavedetatsākṣādiva hutaṃ haviḥ / brahmaṇānāṃ sahasrasya yogasthaṃ grāsayedyadi
यह पितरों के लिए मानो प्रत्यक्ष हवन किया हुआ हवि ही हो जाता है—यदि योगस्थ एक ब्राह्मण को सहस्र ब्राह्मणों के समान ग्रास कराया जाए।