Vaivasvata-Manu Sarga and the Re-Manifestation of the Saptarṣis (वैवस्वतसर्गः—सप्तर्षिप्रादुर्भावः)
ऋष्यन्तरेषु वै बाह्या बहवोङ्गिरसः स्मृताः / मरीचेरपि वक्ष्यामि भेद मुत्तमपूरुषम्
ṛṣyantareṣu vai bāhyā bahavoṅgirasaḥ smṛtāḥ / marīcerapi vakṣyāmi bheda muttamapūruṣam
अन्य ऋषि-परम्पराओं में भी अनेक आङ्गिरस ऋषि प्रसिद्ध माने गए हैं। अब मैं मरीचि के भी उस भेद को, परम पुरुष के विषय में, कहूँगा।