इदं प्रियाय पुत्राय शिष्यायानुगताय तु रहस्यधर्मं वक्तव्यं नान्यस्मै तु कथंचन //
यह ब्रह्मपुराण का उनतालीसवाँ श्लोक-स्थान है; मूल वचन यहाँ उपलब्ध नहीं है।