न तर्कशास्त्रदग्धाय तथैव पिशुनाय च श्लाघिने श्लाघनीयाय प्रशान्ताय तपस्विने //
यह ब्रह्मपुराण का अड़तीसवाँ श्लोक-स्थान है; इसका पाठ यहाँ नहीं दिया गया।