रहस्यं सर्ववेदानाम् अनैतिह्यम् अनागमम् आत्मप्रत्यायकं शास्त्रम् इदं पुत्रानुशासनम् //
यह तैंतीसवाँ श्लोक-संख्या है; मूल वाक्य यहाँ प्रदर्शित नहीं हैं।