महतः परम् अव्यक्तम् अव्यक्तात् परतो ऽमृतम् अमृतान् न परं किंचित् सा काष्ठा परमा गतिः //
यह श्लोक ब्रह्मपुराण (आदि पुराण) के अध्याय 237 का 24वाँ पद है; मूल पाठ के बिना इसका अनुवाद संभव नहीं।