श्रुतिवाक्योदितं सूक्ष्मं तद् विष्णोः परमं पदम् उत्पत्तिं प्रलयं चैव भूतानाम् आगतिं गतिम् //
यहाँ श्लोक का पाठ केवल “छियासठ” संख्या के रूप में दिया है; विस्तृत अर्थ मूल ग्रंथ में देखना चाहिए।