व्याप्यं व्याप्तं यतः सर्वं तद् वै पश्यन्ति सूरयः तद् ब्रह्म परमं धाम तद् धेयं मोक्षकाङ्क्षिभिः //
यहाँ श्लोक का पाठ केवल “पैंसठ” संख्या के रूप में दिया है; विस्तृत अर्थ मूल ग्रंथ में देखना चाहिए।