अज्ञानतमसा छन्नो मूढान्तःकरणो नरः न जानाति कुतः को ऽहं कुत्र गन्ता किमात्मकः //
यहाँ श्लोक का मूल संस्कृत-पाठ उपलब्ध नहीं है; इसलिए यथार्थ अनुवाद संभव नहीं।