तरयेत् प्रच्युतां पृथ्वीं यथा पूर्णां नदीं नराः अवगाह्य च विद्वांसो विप्रा लोलम् इमं तथा //
यह सातवाँ श्लोक है—श्रद्धा से श्रवण करने पर मनुष्य पुण्य पाता है और पाप से मुक्त होता है।